केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा के बैंकों की स्थिति पर उठाए गए सवालों पर मज़ेदार जवाब दिया। राजीव सभा में सीतारमण ने चड्ढा के बैंकों की भौतिक स्थिति पर ध्यान आकर्षित करने पर चुटकी लेते हुए कहा कि पश्चिमी दुनिया का अनुभव देश के लिए लाभकारी हो सकता है। इस दौरान चड्ढा ने बैंकों के बुनियादी ढांचे पर गंभीर चिंताएं भी जताईं।
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- निर्मला सीतारमण ने संसद में राघव चड्ढा की बैंकों की स्थिति पर उठाए गए सवालों पर मज़ेदार प्रतिक्रिया दी।
- चड्ढा ने ग्रामीण बैंकों में पंखे, कुर्सी, दरवाजे जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया।
- सीतारमण ने मज़ाक करते हुए कहा कि चड्ढा का पश्चिमी दुनिया का अनुभव देश के बैंकों के लिए लाभकारी हो सकता है।
- चड्ढा ने बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की आलोचना की और कहा कि यह जन-अपेक्षाओं को पूरा नहीं करता है।
- उन्होंने होम लोन (8.5-9%), शिक्षा लोन (8.5-13%) और MSME लोन (11%) की बढ़ती दरों को चिंता का विषय बताया।
- चड्ढा ने सरकार से ब्याज दरों पर एक सीमा तय करने और पहली बार घर खरीदने वालों के लिए गृह ऋण पर सब्सिडी देने का अनुरोध किया।
- उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के लिए बचत पर ब्याज दरों में गिरावट पर चिंता जताई।
- चड्ढा ने बैंकिंग धोखाधड़ी, खासकर डिजिटल धोखाधड़ी, की बढ़ती घटनाओं की ओर इशारा किया और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाया।
- उन्होंने साइबर सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और उच्च-मूल्य लेनदेन के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया।
- चड्ढा ने ग्रामीण इलाकों में बैंकों की शाखाओं के बंद होने और बैंकिंग सुविधाओं के अभाव को भी आलोचना की और वित्तीय साक्षरता और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास की आवश्यकता पर बल दिया।





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