इमिग्रेशन और फॉरेनर्स बिल 2025 लोकसभा में पेश किया गया, जिसका उद्देश्य इमिग्रेशन सेवाओं को सुव्यवस्थित करना है। हालांकि, विपक्ष ने इसे संविधान के अधिकारों का उल्लंघन बताया और इसे जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी को भेजने की मांग की है।
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- इमिग्रेशन और फॉरेनर्स बिल 2025 मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया।
- यह बिल विदेशियों के प्रवेश, निकासी और देश में रहने से संबंधित सेवाओं को सुव्यवस्थित करने का लक्ष्य रखता है।
- सरकार का कहना है कि यह बिल मौजूदा कानूनों में भरे हुए प्रावधानों को सुधारने के लिए लाया गया है।
- बिल केंद्रीय सरकार को पासपोर्ट, वीजा और पंजीकरण संबंधी आवश्यकताओं को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
- कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने बिल का विरोध किया, इसे संविधान के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए।
- कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी ने आरोप लगाया कि यह बिल मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन करता है और सरकार इसका इस्तेमाल असहमत विचारधाराओं वाले लोगों को प्रवेश से रोकने के लिए कर सकती है।
- तिवारी ने कहा कि बिल में इमिग्रेशन अधिकारी के निर्णय के खिलाफ अपील की कोई व्यवस्था नहीं है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
- विपक्ष ने मांग की कि इस बिल को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के पास भेजा जाए ताकि इसे गंभीरता से परखा जा सके।
- मो.स. गृह मंत्री नित्यानंद राय ने बिल का बचाव करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य शांति और संप्रभुता को बनाए रखते हुए पर्यटकों का स्वागत करना है।
- यह बिल पासपोर्ट, वीजा और इमिग्रेशन प्रक्रियाओं से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए लाया गया है, ताकि प्रशासनिक कार्यवाही बेहतर हो सके।





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