आगामी बजट 2025 में सरकार शिक्षा क्षेत्र को बदलने के लिए नए उपायों की घोषणा कर सकती है, जिसमें डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ये उपाय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के दृष्टिकोण से मेल खाते हैं, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक शिक्षा हब बनाना और छात्रों की रोजगार क्षमता, स्थिरता और क्षेत्रीय शिक्षा पहुंच को सुधारना है।
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- बजट 2025 में शिक्षा संस्थानों में डिजिटल बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने और ऑनलाइन शिक्षा तथा EdTech विकास पर फंड आवंटन की संभावना है।
- राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय, पीएम इंटर्नशिप योजना, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उत्कृष्टता केंद्रों के लिए अधिक फंडिंग की उम्मीद है।
- कृषि और संबंधित क्षेत्रों के लिए एक क्रेडिट गारंटी फंड स्थापित किया जा सकता है, जिससे कृषि-व्यवसायों को ऋण प्राप्त करने में आसानी होगी।
- बजट में अनुसंधान और विकास को मजबूत करने के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं, खासकर उभरती तकनीकों जैसे AI/ML और वेफर निर्माण में।
- प्रतिष्ठित संस्थानों (IoE) के लिए बढ़ी हुई फंडिंग से अधिक वैश्विक प्रतिस्पर्धी शिक्षा संस्थानों की स्थापना हो सकती है।
- क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नए फंडिंग की संभावना है, जिसमें पाठ्यक्रमों का अनुवाद और स्थानीय भाषाओं में पाठ्यक्रमों को तैयार करने के लिए प्रोत्साहन दिया जा सकता है।
- भारतीय ज्ञान प्रणालियों (IKS) में विशेषज्ञ संस्थानों के बीच अकादमिक सहयोग के लिए नई फंडिंग प्रदान की जा सकती है, जिसमें संस्कृत और आदिवासी विश्वविद्यालय शामिल हैं।
- शिक्षक प्रशिक्षण और व्यावासिक शिक्षा के लिए बढ़ी हुई फंडिंग के तहत Nurturing Future Leaders कार्यक्रम और पीएम इंटर्नशिप योजना जैसी योजनाओं को समर्थन मिल सकता है।
- पीएम-USHA और RUSA जैसी पहलों के जरिए उच्च शिक्षा में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने के लिए फंडिंग बढ़ाई जा सकती है।
- बुनियादी साक्षरता और अंकगणित सुधारने के लिए NISHTHA कार्यक्रम और अन्य शिक्षक विकास योजनाओं के लिए बढ़ी हुई फंडिंग की उम्मीद है।





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