विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारतीय कूटनीति के सामने छह प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित करते हुए शांति, विकास, तकनीक, व्यापार और वैश्विक दायित्व पर जोर दिया।
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- जयशंकर ने कहा कि भारत एक अशांत विश्व में उभरने की दिशा में है, जिससे भारतीय कूटनीति के सामने बौद्धिक और रणनीतिक चुनौतियां बढ़ेंगी।
- उन्होंने कहा कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारतीय कूटनीति शांति और विकास को अपने केंद्रीय आधार के रूप में बनाए रखेगी।
- जयशंकर ने शुल्कों में अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था की कमजोरियों को वैश्विक आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बताया।
- उन्होंने चेताया कि तकनीकी प्रतिस्पर्धा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को विभाजित कर सकती है, जबकि तकनीक का व्यापक प्रसार अप्रत्याशित परिवर्तन ला सकता है।
- विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव अधिक जिम्मेदारी भी लाता है, क्योंकि देश अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में अधिक योगदान देता है।
- उन्होंने विदेश नीति को अधिक जनकेंद्रित बताया और कहा कि संस्कृति, इतिहास तथा साझा अनुभव देशों के संबंधों को प्रभावित करते हैं।
- जयशंकर ने कहा कि कई सहस्राब्दियों पुरानी सभ्यता के रूप में भारत का वैश्विक मंच पर प्रमुख स्थान प्राप्त करना असाधारण ऐतिहासिक घटना है।
- उन्होंने कहा कि भारत के उभार पर चर्चा और समय समय पर गलत समझ संभव है, इसलिए प्रभावी संवाद कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।
- ये विचार भारतीय वैश्विक मामलों की परिषद को राष्ट्रीय महत्व की संस्था का दर्जा मिलने के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर रखे गए।
- जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी विशिष्ट पहचान और वैश्विक व्यक्तित्व विकसित करेगा तथा दुनिया तक उसे समझाने के लिए निरंतर संवाद आवश्यक होगा।





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