भारतीय सेना अमेरिकी एफजीएम-148 जेवलिन एंटी टैंक निर्देशित मिसाइल हासिल करने जा रही है, जिससे 17 साल पुरानी तलाश समाप्त होगी।
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- भारतीय सेना अमेरिकी एफजीएम-148 जेवलिन एंटी टैंक निर्देशित मिसाइलों की सीमित संख्या हासिल करने की तैयारी कर रही है।
- खरीद प्रक्रिया विदेशी सैन्य बिक्री व्यवस्था के तहत शुरू हुई है और सेना की आपात खरीद शक्तियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- जेवलिन में चित्र आधारित अवरक्त खोजक लगा है, जो प्रक्षेपण से पहले लक्ष्य को पहचानकर मिसाइल को निर्देशित करता है।
- प्रक्षेपण के बाद स्वतः मार्गदर्शन की क्षमता सैनिकों को तत्काल सुरक्षित स्थान लेने की सुविधा देती है, जिससे उनकी सुरक्षा बढ़ती है।
- जेवलिन की ऊपरी प्रहार क्षमता टैंकों के अपेक्षाकृत कमजोर ऊपरी कवच को निशाना बनाती है और विस्फोटक प्रतिक्रियाशील कवच को भेद सकती है।
- नवंबर 2025 में अमेरिकी रक्षा विभाग ने 100 मिसाइलों, 25 प्रक्षेपकों और संबंधित उपकरणों की संभावित बिक्री की जानकारी दी थी।
- भारत की जेवलिन में रुचि 2009 तक जाती है, जब भारतीय सैनिकों ने युद्ध अभ्यास के दौरान इस मिसाइल का परीक्षण किया था।
- भारत ने बाद में इजरायली स्पाइक मिसाइल को चुना था, लेकिन खरीद प्रक्रिया कई बार रुकी और अंततः सीमित खरीद तक ही आगे बढ़ी।
- भारत में स्वदेशी टैंक रोधी क्षमता विकसित करने के प्रयास भी जारी हैं और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की प्रणाली परीक्षण चरण पार कर चुकी है।
- जेवलिन की खरीद भविष्य में भारत में इसके संयुक्त उत्पादन और निर्माण की संभावनाओं को भी बढ़ा सकती है, जिससे रक्षा आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।





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