नासा ने भारत को चंद्रमा आधार कार्यक्रम में सहयोग का प्रस्ताव दिया है, जिससे चंद्र अन्वेषण और अंतरिक्ष सहयोग के नए अवसर खुलेंगे।
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- नासा ने नई दिल्ली में हुई भारत अमेरिका नागरिक अंतरिक्ष कार्य समूह की नौवीं बैठक के दौरान भारत को कार्यक्रम में शामिल होने का प्रस्ताव दिया।
- प्रस्तावित सहयोग के तहत भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के आसपास लंबे समय तक वैज्ञानिक और मानवीय गतिविधियां बढ़ाने में भाग ले सकता है।
- नासा ने मार्च 2026 में चंद्रमा आधार कार्यक्रम शुरू किया, जिसका उद्देश्य अगले दशक में चंद्रमा पर आवश्यक आधारभूत ढांचा विकसित करना है।
- चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि स्थायी छाया वाले क्षेत्रों में जल बर्फ मौजूद होने की संभावना है।
- भारत के चंद्रयान 3 अभियान ने अगस्त 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सफल पहुंच बनाकर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।
- भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग पहले ही मानव अंतरिक्ष उड़ान और संयुक्त उपग्रह परियोजनाओं के माध्यम से मजबूत हो चुका है।
- भारत ने 2023 में आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत चंद्र अन्वेषण और वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।





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