नासा 12 अगस्त के पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान ऊंचाई वाले अनुसंधान विमान और वैज्ञानिक गुब्बारों की मदद से सूर्य के कोरोना तथा वायुमंडलीय बदलावों का अध्ययन करेगा।
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- नासा का डब्ल्यूबी-57 अनुसंधान विमान चंद्रमा की छाया का पीछा करेगा, जिससे वैज्ञानिकों को ग्रहण संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े लंबे समय तक एकत्र करने में मदद मिलेगी।
- यह विमान वैज्ञानिकों को सूर्य के बाहरी वायुमंडल कोरोना का अध्ययन करने का विशेष अवसर देगा, जिसे सामान्य दिन में देखना अत्यंत कठिन होता है।
- नासा समर्थित राष्ट्रीय ग्रहण गुब्बारा परियोजना की टीमें दिन में अंधेरा होने के दौरान पृथ्वी के वायुमंडल में होने वाले बदलावों को मापेंगी।
- 12 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण वैज्ञानिकों को सूर्य की गतिविधियों और पृथ्वी के आसपास के वातावरण पर उनके प्रभावों का अध्ययन करने का दुर्लभ अवसर देगा।
- वैज्ञानिक ग्रहण के दौरान सूर्य के कोरोना से जुड़े महत्वपूर्ण संकेतों का अध्ययन करेंगे, जिससे सौर गतिविधियों को समझने में नई जानकारी प्राप्त हो सकती है।
- नासा के अनुसार सूर्य का प्रभाव पृथ्वी पर दैनिक जीवन, उपग्रहों और अंतरिक्ष यात्रियों तक पड़ता है, इसलिए ऐसे अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- गुब्बारा परियोजना में शामिल विद्यार्थी और शोध दल वायुमंडलीय आंकड़े एकत्र करेंगे, जिससे जमीन से होने वाले सामान्य ग्रहण अवलोकनों के साथ अतिरिक्त जानकारी मिलेगी।
- विमान, वैज्ञानिक गुब्बारों और विभिन्न अनुसंधान दलों के संयुक्त प्रयास से नासा सूर्य तथा पृथ्वी के वायुमंडल से जुड़ी घटनाओं को बेहतर समझने का प्रयास करेगा।





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