भारतीय नौसेना ने डीएससी ए24 का जलावतरण कर डाइविंग सहायता पोत परियोजना के अंतर्गत निर्मित पाँचवें और अंतिम पोत को सेवा के लिए तैयार किया। यह उपलब्धि स्वदेशी रक्षा निर्माण तथा समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को नई मजबूती प्रदान करती है।
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- भारतीय नौसेना ने 1 अगस्त 2026 को कोलकाता स्थित टिटागढ़ रेल प्रणालियाँ लिमिटेड शिपयार्ड में डीएससी ए24 का जलावतरण किया, जिससे पाँच पोतों की परियोजना पूर्ण हो गई।
- रक्षा मंत्रालय ने 12 फरवरी 2021 को इस परियोजना का अनुबंध प्रदान किया था और लगभग 5.5 वर्षों में सभी पाँच पोतों का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
- डाइविंग सहायता पोत विशेष नौसैनिक पोत हैं, जिनका उपयोग जलमग्न निरीक्षण, मरम्मत, बचाव अभियान, गोताखोरी संचालन तथा बंदरगाह रखरखाव जैसे कार्यों में किया जाता है।
- डीएससी ए24 में द्विनौका ढांचा अपनाया गया है, जिससे पोत को अधिक स्थिरता, विस्तृत कार्य क्षेत्र तथा समुद्री अभियानों में बेहतर संचालन क्षमता प्राप्त होती है।
- लगभग 300 से 400 टन विस्थापन क्षमता वाले इस पोत में आधुनिक गोताखोरी प्रणाली स्थापित की गई है, जो जलमग्न निरीक्षण और बचाव अभियानों को सक्षम बनाती है।
- पोत में प्रयुक्त लगभग 70 प्रतिशत मुख्य तथा सहायक उपकरण भारतीय निर्माताओं से प्राप्त किए गए हैं, जो आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान को सुदृढ़ करते हैं।
- नौसैनिक परंपरा के अनुसार जलावतरण समारोह कमल सिंह, उप नौसेनाध्यक्ष गुरचरण सिंह की धर्मपत्नी, द्वारा संपन्न किया गया।
- इस परियोजना की पूर्णता से भारतीय नौसेना की जलमग्न अभियानों, समुद्री रखरखाव, बचाव कार्यों तथा तटीय सुरक्षा संबंधी क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।





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