हिरोशिमा परमाणु विस्फोट के 81 वर्ष बाद वैज्ञानिकों ने विस्फोट से बने सूक्ष्म कणों में एक नई धातु मिश्रधातु की पहचान की है। यह खोज अत्यधिक ताप, दबाव और तीव्र शीतलन की परिस्थितियों में पदार्थों के निर्माण को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
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- वैज्ञानिकों ने हिरोशिमा खाड़ी से प्राप्त सूक्ष्म अवक्षेप कणों का अध्ययन करते हुए ऐसी नई धातु मिश्रधातु की पहचान की, जिसका अस्तित्व पहले कभी दर्ज नहीं किया गया था।
- यह मिश्रधातु 6 अगस्त 1945 को हुए परमाणु विस्फोट के दौरान बनी, जब अत्यधिक तापमान ने भवनों, इस्पात, कंक्रीट, कांच तथा मिट्टी को तत्काल पिघला दिया था।
- अध्ययन में पाया गया कि इस मिश्रधातु में मुख्य रूप से लोहा, क्रोमियम, निकेल, मैंगनीज, मोलिब्डेनम, सिलिकॉन तथा एल्युमिनियम सम्मिलित हैं, जिन्होंने एक नई घनाकार स्फटिक संरचना बनाई।
- इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी तथा स्फटिक संरचना विश्लेषण द्वारा वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि यह धातु संरचना प्राकृतिक अथवा औद्योगिक रूप से पहले कभी नहीं देखी गई थी।
- शोधकर्ताओं के अनुसार अत्यधिक ताप, तीव्र दबाव और अत्यंत तेज शीतलन के कारण तत्व अलग-अलग रूपों में जमने के बजाय एक नई स्थिर परमाणु संरचना में परिवर्तित हो गए।
- वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज धातुविज्ञान, उच्च क्षमता सामग्री, ग्रह प्रभाव अध्ययन तथा उच्च ताप भौतिकी के क्षेत्रों में भविष्य के अनुसंधान को नई दिशा दे सकती है।
- इस अध्ययन ने नाभिकीय न्यायवैज्ञानिक अध्ययन के महत्व को भी रेखांकित किया है, जिसके माध्यम से परमाणु विस्फोटों से बने पदार्थों की भौतिक तथा रासायनिक संरचना का विश्लेषण किया जाता है।
- यह नई मिश्रधातु उन दुर्लभ पदार्थों की सूची में शामिल हो गई है जिनकी पहचान पहले ट्रिनिटी परमाणु परीक्षण से प्राप्त अवशेषों के अध्ययन के दौरान भी की जा चुकी है।





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