एक ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने सुरक्षित और स्पष्ट रूप से चिन्हित फुटपाथों पर चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया।
BulletsIn
- सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि सुरक्षित और स्पष्ट रूप से चिन्हित फुटपाथों पर चलने का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित मौलिक अधिकार है।
- न्यायालय ने इस अधिकार को आवागमन की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा, संगठन निर्माण तथा जीवन के अधिकार से जोड़ा।
- यह निर्णय एक सड़क दुर्घटना मामले में दिया गया जिसमें अपर्याप्त पैदल यात्री सुविधाओं के कारण 5 वर्षीय बालक की मृत्यु हुई थी।
- न्यायालय ने पाया कि दुर्घटना स्थल पर फुटपाथ और पैदल पारपथ जैसी आवश्यक सुरक्षा सुविधाओं का अभाव था।
- पीड़ित परिवार को प्रदान की गई क्षतिपूर्ति बढ़ाकर ₹11.44 लाख कर दी गई तथा 2 माह के भीतर भुगतान का निर्देश दिया गया।
- निर्णय में कहा गया कि पैदल चलना मानव आवागमन का सबसे मूलभूत और सर्वाधिक सार्वभौमिक माध्यम है।
- नगर विकास प्राधिकरणों, नगर निकायों, पंचायतों तथा स्थानीय संस्थाओं को सुरक्षित पैदल अवसंरचना सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
- न्यायालय ने पैदल यात्रियों के अधिकारों, उत्तरदायित्वों तथा त्वरित न्याय व्यवस्था हेतु पृथक कानून बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.