डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में महाड़ सत्याग्रह सामाजिक समानता, सार्वजनिक अधिकारों तथा अस्पृश्यता विरोधी संघर्ष का महत्वपूर्ण आंदोलन बना।
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- महाड़ सत्याग्रह 1927 में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता के विरोध में प्रारम्भ किया गया था।
- इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य महाराष्ट्र के महाड़ स्थित चावदार तालाब पर दलित समुदाय के अधिकार सुनिश्चित करना था।
- भारतीय जाति व्यवस्था में दलितों को सार्वजनिक जलस्रोतों, सड़कों तथा अनेक सामाजिक सुविधाओं के उपयोग से वंचित रखा जाता था।
- 1923 में बंबई विधान परिषद ने वंचित वर्गों को सरकारी सार्वजनिक सुविधाओं के उपयोग का अधिकार देने संबंधी प्रस्ताव पारित किया था।
- 20 मार्च 1927 को आंबेडकर लगभग 2500 दलितों के साथ चावदार तालाब पहुंचे और सार्वजनिक रूप से जल ग्रहण किया।
- इस घटना के बाद उच्च जाति समूहों ने तीव्र विरोध प्रदर्शन किया तथा सामाजिक समानता की मांग का विरोध किया।
- दिसंबर 1927 में आंबेडकर और उनके समर्थकों ने जातिगत असमानता के विरोध में मनुस्मृति का सार्वजनिक दहन किया।
- महाड़ सत्याग्रह दलित अधिकार आंदोलन और सामाजिक सुधार संघर्षों का महत्वपूर्ण प्रतीक बना जिसने भविष्य के आंदोलनों को प्रेरित किया।





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