मार्शल लॉ वह स्थिति है जब देश में गंभीर संकट के दौरान नागरिक शासन की जगह सेना प्रशासन संभालती है और सामान्य कानून व अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं।
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- मार्शल लॉ में सेना नागरिक प्रशासन की जगह ले लेती है और सामान्य कानून तथा न्यायिक प्रक्रियाएं स्थगित कर दी जाती हैं ताकि व्यवस्था बहाल की जा सके।
- इसे आमतौर पर युद्ध, विद्रोह, आक्रमण या बड़े पैमाने पर अशांति जैसी स्थितियों में लागू किया जाता है, जब सामान्य शासन व्यवस्था विफल हो जाती है।
- इस दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, आवाजाही और सभा जैसे मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है और कर्फ्यू जैसे सख्त कदम लागू होते हैं।
- नागरिक अदालतों की जगह सैन्य अदालतें काम कर सकती हैं, जहां सेना नागरिकों पर भी मुकदमा चला सकती है और निर्णय ले सकती है।
- भारत में मार्शल लॉ का स्पष्ट उल्लेख संविधान में नहीं है, लेकिन अनुच्छेद 34 के तहत इसे अप्रत्यक्ष रूप से मान्यता दी गई है।
- संसद को यह अधिकार है कि वह मार्शल लॉ के दौरान किए गए कार्यों को वैध ठहराए और अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करे।
- मार्शल लॉ राष्ट्रीय आपातकाल से अलग है, क्योंकि यह सीमित क्षेत्र में लागू होता है और सीधे सामान्य कानून को निलंबित करता है।
- यह एक अस्थायी और कठोर उपाय माना जाता है, जिसका उपयोग केवल तब किया जाता है जब सामान्य स्थिति बहाल करने के अन्य विकल्प विफल हो जाएं।





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