उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले स्थित लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत और चीन के बीच सीमा-पार व्यापार जून 2026 में फिर शुरू होने जा रहा है। इससे हिमालयी क्षेत्र के पुराने व्यापारिक मार्ग को नया जीवन मिलेगा और स्थानीय समुदायों की आजीविका, पारंपरिक व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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- उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन व्यापार जून 2026 में फिर शुरू होने जा रहा है, जिससे हिमालय के एक ऐतिहासिक सीमा-पार व्यापार मार्ग का पुनर्जीवन होगा।
- लिपुलेख दर्रा उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में भारत-नेपाल-चीन त्रिजंक्शन के पास स्थित है और भारत को चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से जोड़ता है।
- यह दर्रा लगभग 5,334 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, इसलिए यह सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च हिमालयी मार्गों में गिना जाता है।
- सदियों से यह भारतीय उपमहाद्वीप और तिब्बती पठार के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्क का प्राचीन मार्ग रहा है।
लिपुलेख 1992 में चीन के साथ व्यापार के लिए खोला गया भारत का पहला सीमा व्यापार केंद्र था, बाद में शिपकी ला और नाथू ला भी खोले गए। - व्यापार फिर शुरू होने से सीमा क्षेत्र के स्थानीय समुदायों, खासकर पारंपरिक ट्रांस-हिमालयी व्यापार पर निर्भर लोगों, को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
- यह दर्रा धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक प्रमुख मार्ग है, जो हिंदू, बौद्ध और जैन समुदायों के लिए पवित्र है।
- इस कदम से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि सीमावर्ती कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे और हिमालयी क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति भी मजबूत होगी।





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