भारतीय संविधान का अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को संसद के सत्र में न होने पर तत्काल आवश्यक कानून बनाने के लिए अध्यादेश जारी करने की शक्ति देता है।
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- अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के सत्र में न होने पर या किसी एक सदन के सत्र में न होने पर अध्यादेश जारी कर सकते हैं।
- अध्यादेश जारी करने की शक्ति राष्ट्रपति की विधायी शक्तियों का हिस्सा है, जिसका उपयोग अत्यावश्यक परिस्थितियों में अस्थायी कानून बनाने के लिए किया जाता है।
- यह शक्ति राष्ट्रपति की व्यक्तिगत विवेकाधीन शक्ति नहीं है, क्योंकि वे प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही कार्य करते हैं।
- अध्यादेश को संसद द्वारा पारित कानून के समान प्रभाव प्राप्त होता है, लेकिन यह अस्थायी होता है और संसद की स्वीकृति आवश्यक होती है।
- संसद के पुनः सत्र में आने पर अध्यादेश को दोनों सदनों के समक्ष रखा जाता है और छह सप्ताह के भीतर उसकी मंजूरी आवश्यक होती है।
- यदि निर्धारित समय के भीतर संसद की स्वीकृति नहीं मिलती है तो अध्यादेश स्वतः समाप्त हो जाता है, हालांकि उसके अंतर्गत किए गए कार्य वैध रहते हैं।
- राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति संसद की विधायी शक्ति के समान होती है, लेकिन इसका उपयोग संविधान संशोधन या मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए नहीं किया जा सकता।
- उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अध्यादेश जारी करने में राष्ट्रपति की संतुष्टि न्यायिक समीक्षा के अधीन होती है, जैसा कि कूपर मामला और डी.सी. वाधवा मामला में कहा गया।





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