मध्य प्रदेश के बुरहानपुर स्थित खूनी भंडारा अपनी अद्वितीय भूमिगत जल प्रबंधन व्यवस्था और मुगलकालीन अभियंत्रिकी कौशल के कारण यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल है।
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- खूनी भंडारा मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में स्थित मुगलकालीन भूमिगत जल प्रबंधन प्रणाली है, जिसमें 1615 में निर्मित 8 जल संरचनाएँ सम्मिलित हैं।
- इस व्यवस्था का निर्माण सम्राट जहाँगीर के शासनकाल में फ़ारसी भूवैज्ञानिक तबकुतुल अर्ज के मार्गदर्शन में बढ़ती जल आवश्यकता को पूरा करने के लिए किया गया।
- यह प्रणाली फ़ारसी कनात पद्धति पर आधारित है, जिसमें भूमिगत जल को गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से बिना बाहरी ऊर्जा के दूर तक पहुँचाया जाता है।
- इस जल प्रणाली में 103 कुंडियाँ तथा 3.9 किलोमीटर लंबी भूमिगत संगमरमर सुरंग है, जिससे पूरे ऐतिहासिक नगर में जल वितरण संभव हुआ।
- यूनेस्को की अस्थायी सूची में इसे सांस्कृतिक मानदंड (ii), (iii) और (iv) के अंतर्गत सांस्कृतिक आदान-प्रदान, जल प्रबंधन परंपरा और अभियंत्रिकी उत्कृष्टता के लिए नामित किया गया।
- संरक्षण कार्यों के बाद यह प्रणाली आज भी प्रतिदिन लगभग 1.8 मिलियन लीटर जल उपलब्ध कराती है, जो इसकी दीर्घकालिक उपयोगिता को दर्शाती है।
- इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग के अधीन किया जा रहा है तथा स्थानीय प्रशासन इसके पुनरुद्धार और संरक्षण पर कार्य कर रहा है।





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