2025 के अंत में जब अमेरिकी शटडाउन के कारण नासा के डेटा सर्वर ठप पड़ गए, तब भारत के खगोल विज्ञान केंद्रों ने कमान संभाली। भारतीय वेधशालाओं ने अंतरतारकीय धूमकेतु 3I/ATLAS का लगातार निरीक्षण किया — यह सौरमंडल में प्रवेश करने वाला तीसरा ऐसा पिंड है। भारतीय वैज्ञानिकों के समन्वित प्रयासों से निरंतर डेटा उपलब्ध रहा, जिससे ग्रहों और सौरमंडलों की उत्पत्ति को समझने में मदद मिल रही है।
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• 3I/ATLAS की खोज 2025 की शुरुआत में हुई, ‘ओउमुआमुआ’ और ‘बोरिसोव’ के बाद तीसरा अंतरतारकीय धूमकेतु
• यह सौरमंडल के बाहर से आया, दूरस्थ तारों की रासायनिक सामग्री साथ लाया
• अक्टूबर में नासा के सर्वर बंद होने से डेटा प्रवाह रुक गया
• भारतीय संस्थान – IIA, ARIES और IUCAA – ने आपात ट्रैकिंग शुरू की
• उत्तराखंड की देवस्थल दूरबीन बनी दुनिया की प्रमुख निगरानी सुविधा
• भारतीय वैज्ञानिकों ने डेटा ESA और यूरोपीय केंद्रों को साझा किया
• धूमकेतु के सूर्य के पीछे जाने तक निरंतर निगरानी जारी रखी गई
• डेटा से प्रारंभिक ब्रह्मांड के बर्फ, खनिज और जैविक अणु मिले
• ग्रह निर्माण की वैज्ञानिक समझ को नया आकार देने में मदद मिलेगी
• इस प्रयास ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता और वैश्विक नेतृत्व को दर्शाया




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