वर्ष 1926 में कलकत्ता में स्थापित ग्रेटर इंडिया सोसाइटी की सौवीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में आयोजित एक तीन दिवसीय सम्मेलन में पूरे एशिया में भारत के ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंधों की समीक्षा की गई।
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- संस्कृति मंत्रालय के तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र 14 से 16 अक्टूबर, 2026 तक नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के सांस्कृतिक संबंधों पर बृहत्तर भारत सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
- यह सम्मेलन 14 अक्टूबर, 1926 को कलकत्ता में स्थापित ग्रेटर इंडिया सोसाइटी, जिसे बृहत्तर भारत परिषद भी कहा जाता है, की शताब्दी का प्रतीक है।
- नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ग्रेटर इंडिया सोसाइटी के आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे।
- इसमें 50 देशों के प्रतिनिधियों, राजदूतों और विद्वानों के भाग लेने की उम्मीद है।
- बृहत्तर भारत का तात्पर्य भारतीय सांस्कृतिक, दार्शनिक, कलात्मक, भाषाई और धार्मिक परंपराओं के प्रसार और अनुकूलन से निर्मित व्यापक सभ्यतागत क्षेत्र से है।
- संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जोर देकर कहा कि किसी सभ्यता के प्रभाव को केवल क्षेत्रीय सीमाओं से नहीं मापा जाता है।
- उद्घाटन सत्र के लिए अपने संदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि नालंदा जैसे शिक्षण केंद्रों ने भारत और एशिया के अन्य हिस्सों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को मजबूत किया है।
- सम्मेलन का आयोजन बृहत्तर भारत योजना (2026-2031) के तहत किया गया है, जिसे मंत्रालय की ग्लोबल एंगेजमेंट योजना के तहत कला केंद्र द्वारा चलाया जा रहा है।
- यह संयुक्त अनुसंधान और प्रकाशनों को प्रोत्साहित करेगा और यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कार्यक्रम और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के लिए बहुराष्ट्रीय नामांकन के लिए संयुक्त नामांकन की खोज करेगा।
- यह इस विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रलेखित करने, संरक्षित करने और साझा करने के लिए एक प्रस्तावित बृहत्तर भारत पोर्टल का भी समर्थन करता है।





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