अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीज़ा के लिए सख़्त जांच प्रक्रिया लागू की है, जिसके तहत अधिकारियों को यह देखना होगा कि क्या आवेदक अमेरिकी मुक्त भाषण (Free Speech) को सेंसर करने वाली गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
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- 2 दिसंबर 2025 की स्टेट डिपार्टमेंट की केबल में H-1B आवेदकों की विस्तृत जांच का आदेश।
- नीति सभी वीज़ा आवेदकों पर लागू, पर H-1B पर विशेष जोर।
- अधिकारियों को रेज़्यूमे और LinkedIn प्रोफाइल की जांच करनी होगी—यहां तक कि परिवार के सदस्यों की भी।
- यदि आवेदक मिसइन्फॉर्मेशन, डिसइन्फॉर्मेशन, कंटेंट मॉडरेशन, फैक्ट-चेकिंग, कंप्लायंस, ऑनलाइन सेफ्टी आदि में काम करते पाए जाते हैं, तो उनका इतिहास गहराई से खंगाला जाएगा।
- यदि प्रमाण मिले कि आवेदक ने अमेरिका में संरक्षित अभिव्यक्ति (Protected Speech) को सेंसर किया, तो उन्हें वीज़ा के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
- यह नियम नए और पुनः-आवेदन दोनों पर लागू।
- तर्क: tech सेक्टर में काम करने वाले H-1B पेशेवर अक्सर सोशल मीडिया या फाइनेंस में होते हैं, जिन पर प्रशासन “कंज़र्वेटिव मतों को दबाने” का आरोप लगाता है।
- ट्रंप प्रशासन पहले ही स्टूडेंट वीज़ा जांच को कठोर बना चुका है (सोशल मीडिया पोस्ट की स्कैनिंग सहित)।
- सितंबर में H-1B पर नई फीस बढ़ोतरी लागू।




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