भारत ने यूरोपीय संघ (EU), चिली और न्यूज़ीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ताओं को तेज़ कर दिया है। इसका उद्देश्य निर्यात में विविधता लाना और दुर्लभ खनिजों (rare-earth minerals) की आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जिससे निर्माण और ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिले।
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- भारत का लक्ष्य 2025 के अंत तक EU, चिली और न्यूज़ीलैंड के साथ FTA को अंतिम रूप देना।
- समझौते से श्रम-प्रधान उद्योगों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
- EU के साथ समझौता नवंबर तक संभव, प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनने की उम्मीद।
- EU चाहता है ऑटोमोबाइल, व्हिस्की और वाइन पर भारत के उच्च शुल्कों में कटौती।
- भारत में वर्तमान में वाइन पर 150%, लक्ज़री कारों पर 110%, और मिड-रेंज कारों पर 70% शुल्क।
- चिली और न्यूज़ीलैंड के साथ वार्ताएँ तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं ताकि विविधता जल्द मिले।
- ध्यान वस्त्र, जूते और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर, जिन्हें अमेरिकी शुल्कों से नुकसान हुआ।
- यह FTA रणनीति अमेरिका और चीन से परे नए बाज़ारों की खोज का हिस्सा।
- वाणिज्य मंत्रालय संतुलित समझौतों पर ध्यान दे रहा है ताकि घरेलू उद्योग और MSME सुरक्षित रहें।
- समझौते से भारत का वैश्विक व्यापार प्रभाव बढ़ेगा और आयात निर्भरता घटेगी।




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